Saturday, April 19, 2025

शब्दों की मिठास: जब दया बोलती है, ब्रह्मांड सुनता है

 

Subah ki shaanti, khule aasman ke neeche likhe kuch dil se nikle alfaaz… paas mein khilte phool, halka sa thanda hawa ka jhonka, aur ek muskurahat jo sirf apne hone se aati hai. Kabhi-kabhi bas yeh hi kaafi hota hai apne aap se milne ke liye.”



शब्दों की मिठास


धीरे बोलो, कोमल बनो,

हर लफ़्ज़ में रखो थोड़ा सा उजास।

क्योंकि शब्द केवल ध्वनि नहीं होते,

वे बन जाते हैं किसी के दिल की साँस।


तुम जब मुस्कुराकर बोलते हो,

किसी टूटे को फिर से जोड़ते हो।

बिना जाने, बिना कहे,

तुम किसी का उजड़ा मन संवारते हो।


दयालुता के बीज जो बोओगे,

वो लौटेंगे फूल बनकर।

ब्रह्मांड सब देखता है चुपचाप,

फिर भर देता है दामन तुम्हारा —

प्यार, सुख, और अवसरों के साथ।


तो चलो,

कठिन दुनिया में नरम बने रहें,

अपने शब्दों से रौशनी बाँटें —

क्योंकि जहाँ दयालुता होती है,

वहीं सच्ची समृद्धि पलती है।



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